संवाद सहयोगी,नालासोपारा
: नालासोपारा नकोड़ा हाईट्स यसवंत गौरव में चल रही माँ विंध्यवासिनी सेवा समिति एवम यसवंत
गौरव परिवार मंडल द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का सातवें और अंतिम दिन समापन हो गया। कथावाचक पंडित
अनिल शुक्ला शास्त्री जी ने इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन किया।
पंडित अनिल शुक्ला शास्त्री
ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सातवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना, सुभद्रा हरण का आख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास पंडित
अनिल शुक्ला शास्त्री ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जी से समझा जा सकता है। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे लेकिन द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं, इसपर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब भी भक्तों पर विपदा आई है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। नकोड़ा हाईट्स यसवंत गौरव में चल रही माँ विंध्यवासिनी सेवा समिति एवम यसवंत
गौरव परिवार मंडल द्वारा सात दिवसीय कथा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। अंत में भागवत भगवान की आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने शिरकत की।
इस अवसर पर राकेश
तिवारी,आशीष त्रिपाठी,मनोज पाठक,स्वाती उपाध्याय ,बबीता शुक्ला ,श्वेता उपाध्याय ,दिलीप
सिंह,हेमंत शुक्ला,उमेश दुबे जी सहित क्षेत्र के कई श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

